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मुख़्तार अंसारी अपराधी हैं तो राजा भय्या किस मनिदर के पुजारी हैं?

नई दिल्ली,राजनीतिक दल पाक साफ नदी की तरह होते हैं। कंडीडेट कितना बड़ा अपराधी हो अगर इन राजनीतिक दलों में शामिल हो जाए या राजनीतिक दल उसे खुद ही शामिल कर लें तो उसके सारे पाप धुल जाते हैं। पूर्व में उसने कितने ही अपराध किए हों कोई मायने नहीं रखते। उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया जिन पर दर्जनों केस दर्ज हैं उनपर दर्ज मामलों पर सब मौन हैं। सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आपराधिक मामलों में शामिल लोगों को पार्टी में शामिल नहीं करने की बात कही थी। दूसरी तरफ मुख्तार अंसारी को बीएसपी ने अपनी पार्टी में शामिल कर लिया तो चारों तरफ आलोचना की जा रही है। जबकि हकीकत ये है आपराधिक मामलों में राजा भैया मुख्तार अंसारी से कोसों आगे हैं।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा के रहने वाले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का आपराधिक इतिहास रहा है। राजा भैया ने ऐसे कई कारनामें किए जिसके चलते वह हमेश सुर्खियों में रहे। रघुराज प्रताप सिंह पर मारपीट, डकैती हत्या जैसे हर मामले में अपनी दबंगई दिखाई है। इतना ही नहीं राज भैया पोटा के तहत जेल की हवा भी खा चुके हैं।

राजा भैया ने नवंबर 2002 में भाजपा विधायक पूरन सिंह को जान से मारने की धमकी दी। जिसके चलते सरकार ने उनके खिलाफ एक्शन लिया और उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसी साल उनके समर्थकों के घर से बड़ी मात्रा में शराब की दुकानों के दस्तावेज बरामद हुए जिसके चलते राजा भैया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

24 नवंबर 2002 को राजा भैया और उनके भाई अक्षय प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। साल 2002 में उनके अपराधों का कारवां जारी रहा और दिसंबर 2002 में राजा भैया और उनके पिता को डकैती और जबरन घर कब्जाने के चलते उनपर मुकदमा दायर हुआ। जनवरी 2003 में राजा भैया के घर पर पुलिस ने छापा मारा और भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद हुए। उसी साल उनके तालाब में नर कंकाल भी मिला जिसके चलते उन पर हत्या का आरोप लगाया गया।

5 मई 2003 को सूबे की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने राजा भैया उनके पिता उदय प्रताप सिंह और उनके कई करीबी लोगों पर पोटा के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद राजा भैया और उनके पिता ने 14 नवंबर 2005 को कानपुर के पोटा कोर्ट में समर्पण कर दिया।

2 मार्च 2013 में हुए डीएसपी जिया उल हक हत्याकांड में राजा भैया के शामिल होने की बात कही। जिया उल हक की पत्नी परवीन आजाद ने हत्या के लिए राजा भैया को जिम्मेदार ठहराया था।

वहीं अगर मुख्तार अंसारी की बात की जाए तो वो डे लाइट मर्डर में मुख्य आरोपी हैं। 2009 में हुई इस घटना में दो गुटों मे आमने सामने गोली बारी की गई थी जिसमें मन्ना सिंह, राजेश राय की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं एक बार फिर 2010 में उत्तर प्रदेश के सिपाई सतीश कुमार और पहले मामले के चश्मदीद गवाह रहे राम सिंह मौर्य को दिन दहाड़े गोली मार दी गई थी। इन दोनों मामलों में मुख्तार अंसारी का हाथ बताया गया था वहीं नवंबर 2005 में तत्कालीन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय और उनके 6 साथियों की हत्या कर दी गई थी। विधायक की पत्नी अलका राय ने हत्या का आरोप मुख्तार अंसारी और उनके करीबी लोगों पर लगाया था।

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